बालकोंडा में डबल बेडरूम मकानों के आवंटन में अनियमितताओं के आरोप

20 पात्र गरीब परिवारों ने कलेक्टर से की शिकायत, जांच के आदेश.

आर्मूर प्रतिनिधि: निजामाबाद जिले के बालकोंडा में डबल बेडरूम मकानों के दूसरे चरण के लाभार्थियों के चयन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि स्थानीय गरीब और पात्र परिवारों को नजरअंदाज कर महाराष्ट्र तथा तेलंगाना के अन्य क्षेत्रों से आकर बसे लोगों को डबल बेडरूम मकान आवंटित किए गए। इस संबंध में करीब 20 पात्र गरीब परिवारों ने सोमवार को आयोजित प्रजावाणी कार्यक्रम में जिला कलेक्टर को कथित अपात्र लाभार्थियों की सूची सौंपकर शिकायत की। बताया जा रहा है कि कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।

 

 

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, 30 सितंबर को दूसरे चरण के लाभार्थियों के चयन के दौरान स्थानीय स्तर पर तैयार की गई सूची में अन्य क्षेत्रों से आए लोगों के नाम शामिल किए गए। आरोप है कि पहले और दूसरे चरण के डबल बेडरूम मकानों की लाभार्थी सूची तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव और मंडल परिषद अधिकारियों द्वारा तैयार कर जिला आवास अधिकारियों को भेजी गई थी। बाद में उसी सूची को स्वीकृति देकर संबंधित अधिकारियों को सौंप दिया गया।

 

 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूची में शामिल कुछ लोगों के पास पहले से ही अपने मकान और कृषि भूमि मौजूद हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपने मकान खाली कर बालकोंडा की दूसरी गलियों में किराए पर रहने का दिखावा किया और जांच के दौरान खुद को वर्षों से किराए के मकान में रहने वाला तथा बेघर बताकर पात्रता हासिल कर ली। इस पूरी प्रक्रिया में तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

 

 

वहीं, कुछ स्थानीय परिवारों को मकान होने के आधार पर पात्रता सूची से बाहर कर दिया गया, जबकि कथित तौर पर कुछ लोगों को मकान संख्या नहीं होने के बावजूद ऑनलाइन नंबर आवंटित किए गए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अधिकारियों द्वारा तैयार की गई पात्रता सूची के कारण बालकोंडा के वास्तविक जरूरतमंद स्थानीय परिवार पहले और दूसरे चरण के डबल बेडरूम मकानों से वंचित रह गए।

 

 

इस मामले में तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव, मंडल परिषद अधिकारी और ऑनलाइन नंबर आवंटित करने वाले डाटा एंट्री ऑपरेटरों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जा रही है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन नंबरों के आवंटन में कथित तौर पर आर्थिक लेन-देन भी हुआ है। उनका कहना है कि प्रजापालन के दौरान डबल बेडरूम मकानों के लिए आवेदन करने वाले सभी आवेदकों की सूची और ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच की जाए तो कथित अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।

 

तहसीलदार की कोई भूमिका नहीं होने का दावा

स्थानीय लोगों का कहना है कि 30 सितंबर को हुए दूसरे चरण के डबल बेडरूम मकानों के लकी ड्रॉ और लाभार्थियों के चयन में बालकोंडा तहसीलदार की कोई भूमिका नहीं थी। आरोपों के अनुसार, तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव, मंडल परिषद अधिकारी और डाटा एंट्री ऑपरेटरों द्वारा तैयार की गई लाभार्थी सूची ही मंडल विकास अधिकारी के माध्यम से तहसीलदार को सौंपी गई थी। इसलिए इस मामले में तहसीलदार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा, ऐसा स्थानीय लोगों का कहना है।

 

लाभार्थियों से पैसे मांगने के भी आरोप

दूसरी ओर, कुछ स्थानीय नेताओं पर डबल बेडरूम मकान दिलाने के नाम पर लाभार्थियों को परेशान करने के आरोप भी सामने आए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ नेता कथित तौर पर मकान दिलाने में अपनी भूमिका का दावा करते हुए लाभार्थियों से पहले 75 हजार रुपये और मकान आवंटित होने के बाद शेष 75 हजार रुपये देने का दबाव बना रहे हैं। इस तरह कुल डेढ़ लाख रुपये की मांग किए जाने की चर्चा गांव में है।

 

 

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस मामले की गोपनीय और निष्पक्ष जांच कराने तथा कथित रूप से पैसे मांगने वाले नेताओं की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही लाभार्थियों से अपील की है कि मकान आवंटन के नाम पर किसी भी व्यक्ति को एक रुपया भी न दें। अब जिला कलेक्टर द्वारा दिए गए जांच आदेश के बाद पूरे मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर स्थानीय लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।