बालकोंडा में कथित अवैध निर्माणों पर कांग्रेस और भाजपा की चुप्पी क्यों?

सरकारी जमीन पर कब्जे और फर्जी दस्तावेजों से रजिस्ट्रेशन के आरोप, कार्रवाई की मांग.

निजामाबाद / आर्मूर: निजामाबाद जिले के बालकोंडा क्षेत्र में कथित भूमि कब्जों और अवैध निर्माणों को लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा तेज हो गई है। आरोप है कि सर्वे नंबर 1329 से 1333 के बीच स्थित सरकारी पहाड़ियों और मिट्टी के टीलों को रात के समय जेसीबी मशीनों से खोदकर कृषि भूमि में परिवर्तित किया जा रहा है। इसके बाद कथित तौर पर अन्य स्थानों की पट्टा भूमि के दस्तावेजों के आधार पर बाई-नंबर लेकर अवैध रूप से रजिस्ट्रेशन कराए जा रहे हैं। स्थानीय लोग इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

 

बिना नंबर के लगाए जा रहे बिजली के खंभे?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ कब्जाधारियों ने सरकारी पहाड़ियों को समतल कर कृषि भूमि में बदलने के बाद ग्राम पंचायत सचिव के माध्यम से स्वामित्व प्रमाणपत्र प्राप्त किए हैं। इसके बाद बिजली विभाग के अधिकारियों की कथित मिलीभगत से बिना नंबर वाले बिजली के खंभे लगाकर कृषि गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

 

खुले स्थानों पर निर्माण को लेकर सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 1974 में तत्कालीन अविभाजित निजामाबाद जिले के कलेक्टर बी.के. पेंटैया, आईएएस की अनुमति से कुछ भूमि को प्लॉटों में विभाजित कर खुली नीलामी के माध्यम से बेचा गया था। वहीं, बड़े पत्थरों वाले कुछ हिस्सों को खुले स्थान के रूप में छोड़ा गया था। अब इन खुले स्थानों पर कथित अवैध निर्माणों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों ने मांग की है कि संबंधित निर्माणों के सर्वे नंबर, मकान नंबर और रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों की जांच की जाए।

कांग्रेस और भाजपा नेताओं की चुप्पी पर सवाल

स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि बालकोंडा में कथित अवैध निर्माणों के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के नेता खुलकर सामने क्यों नहीं आ रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधियों और स्थानीय पत्रकारों को इस मामले को अधिकारियों के सामने उठाना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

 

कम्मरपल्ली की तरह बालकोंडा में कार्रवाई क्यों नहीं?

हाल ही में कम्मरपल्ली मंडल केंद्र में करीब 9 करोड़ रुपये मूल्य की 33 गुंटा सरकारी भूमि पर कथित कब्जे का मामला सामने आया था। रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने उस भूमि को कब्जे से मुक्त कराकर वहां की ग्राम विकास समिति (वीडीसी) को सौंपा था। इसी उदाहरण का हवाला देते हुए बालकोंडा के नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि यहां भी सरकारी जमीन को कब्जों से मुक्त कराने के लिए वैसी ही कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।

 

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, सरकारी भूमि का सीमांकन करने तथा यदि अवैध कब्जे और निर्माण पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।