प्रेस क्लब और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के भवनों के लिए भूमि आवंटित करने की मांग.
आर्मूर प्रतिनिधी : तेलंगाना के निजामाबाद जिले के बालकोंडा में ग्राम पंचायत की सरकारी जमीन पर कथित अवैध निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता व्याप्त है। करोड़ों रुपये मूल्य की बताई जा रही इस भूमि पर निर्माण को लेकर स्थानीय नागरिकों, युवा संगठनों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों, वरिष्ठ नागरिकों और पत्रकारों ने जिला कलेक्टर से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने इस भूमि पर बालकोंडा निर्वाचन क्षेत्र के प्रेस क्लब तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के भवनों के निर्माण के लिए जमीन आवंटित करने की अपील की है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सर्वे नंबर 1340 और 1342 में स्थित ग्राम पंचायत की अतिरिक्त भूमि पर वर्ष 1974 में तत्कालीन ग्राम पंचायत कार्यकारी अधिकारी गुलाम मोहम्मद के कार्यकाल के दौरान पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर लेआउट विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। बालकोंडा ग्राम पंचायत के पत्र संख्या 78/74, दिनांक 10 सितंबर 1974 तथा तत्कालीन जिला कलेक्टर बी.के. पेंटैया, आईएएस के एल. डिस. संख्या 5853/1974, दिनांक 20 दिसंबर 1974 से संबंधित दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया गया कि पंचायत की अतिरिक्त भूमि पर लेआउट बनाने की अनुमति दी गई थी।
बताया जाता है कि वर्ष 1974 में इस भूमि पर लेआउट विकसित कर नीलामी के माध्यम से भूखंड बेचे गए थे। हालांकि, पत्थरीली जमीन के कुछ हिस्सों को भविष्य में सार्वजनिक उपयोग के लिए खुले स्थान के रूप में चिह्नित किया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन खुले स्थानों को अन्य प्रयोजनों के लिए आवंटित करने हेतु ग्राम पंचायत का प्रस्ताव पारित कर जिला पंचायत अधिकारी के माध्यम से जिला कलेक्टर की मंजूरी लेना आवश्यक है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि संबंधित भूमि के संबंध में कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कर तीसरे पक्ष के माध्यम से खरीद-बिक्री और पंजीकरण कराया गया है। उनका सवाल है कि जिला कलेक्टर की अनुमति के बिना सरकारी भूमि पर निर्माण कार्य कैसे किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित दस्तावेजों की आधिकारिक जांच होना अभी बाकी है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला कलेक्टर से मामले की विस्तृत जांच कराने, कथित अवैध निर्माण पर उचित कार्रवाई करने, सरकारी जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा यदि अनियमितताएं प्रमाणित हों तो संबंधित पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने विवादित भूमि को नियमानुसार सरकारी नियंत्रण में लेकर शेष खुले स्थान को प्रेस क्लब और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के भवनों के लिए आवंटित करने की अपील की है।
इस मामले में जिला प्रशासन और संबंधित ग्राम पंचायत की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही भूमि के स्वामित्व, दस्तावेजों की वैधता और निर्माण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
