एआई क्रांति से जनजातीय कल्याण को नई दिशा, तेलंगाना बना देश के लिए मॉडल.
‘एआई ट्राइबल इनोवेशन मिशन’ के जरिए डिजिटल सशक्तिकरण की ओर बड़ा कदम.
हैदराबाद प्रतिनिधि :- तेलंगाना सरकार ने जनजातीय कल्याण को पारंपरिक योजनाओं की सीमाओं से आगे बढ़ाते हुए डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर राज्य सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जनजातीय कल्याण मंत्री आदिलुरी लक्ष्मण कुमार ने कहा कि सरकार जनजातीय समाज को जंगलों से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तक विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में सरकार जनजातीय समुदाय के जीवन स्तर में सुधार के लिए ऐतिहासिक फैसले ले रही है। उन्होंने कहा कि “इनोवेशन के जरिए समावेशी विकास” सरकार का लक्ष्य है और अब एआई को जनजातीय कल्याण का हिस्सा बनाकर नए तेलंगाना के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है।
शिक्षा में एआई आधारित स्मार्ट लर्निंग
मंत्री ने बताया कि जनजातीय छात्रों को विश्वस्तरीय अवसर देने के लिए एआई आधारित शिक्षा प्रणाली लागू की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्चुअल टीचर और डिजिटल ट्यूटर उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एआई आधारित मॉक टेस्ट और करियर गाइडेंस दी जाएगी।
हर जनजातीय छात्र को डिजिटल और एआई कौशल सिखाने का लक्ष्य रखा गया है। छात्रों की कमजोरियों की पहचान कर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और जनजातीय भाषाओं में ई-लर्निंग सामग्री विकसित की जाएगी। एकलव्य और आश्रम स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए जाएंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं में एआई की मदद
दूरदराज के जनजातीय गांवों में एआई आधारित टेलीमेडिसिन सेवाएं शुरू की जाएंगी। गर्भवती महिलाओं और शिशुओं की स्वास्थ्य स्थिति की लगातार निगरानी के लिए एआई सिस्टम विकसित किया जा रहा है। मोबाइल हेल्थ यूनिट्स में एआई आधारित हेल्थ स्क्रीनिंग लागू की जाएगी ताकि बीमारियों की शुरुआती पहचान संभव हो सके।
पोषण की कमी की पहचान कर त्वरित पोषण सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ गांव-गांव स्वास्थ्य मैपिंग की जाएगी। स्थानीय भाषाओं में एआई चैटबॉट्स के जरिए स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
रोजगार और आजीविका को डिजिटल मजबूती
मंत्री ने कहा कि जनजातीय युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजक बनें, यही सरकार की मंशा है। जनजातीय किसानों को एआई आधारित खेती संबंधी सलाह और जलवायु परिवर्तन की पूर्व चेतावनी दी जाएगी।
लघु वनोपज के सही बाजार मूल्य की जानकारी एआई के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। जनजातीय महिलाओं के बांस, हस्तशिल्प और वन उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। एआई आधारित स्किल मैपिंग के जरिए युवाओं के लिए रोजगार अवसर सृजित किए जाएंगे।
‘एआई ट्राइबल इनोवेशन मिशन’ की शुरुआत
जनजातीय कल्याण विभाग और आईटी विभाग मिलकर “एआई ट्राइबल इनोवेशन मिशन” शुरू करेंगे। हर जनजातीय गुरुकुल में एआई एवं कोडिंग लैब स्थापित की जाएंगी। हैदराबाद को एआई हब के रूप में विकसित कर जनजातीय टेक इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा।
आईटी कंपनियों की CSR साझेदारी से वारंगल में ट्राइबल डिजिटल ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां युवाओं को डेटा एनालिटिक्स, एआई, साइबर सिक्योरिटी और कोडिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। विशेष एआई इंटर्नशिप कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे।
“एआई सिर्फ तकनीक नहीं, सामाजिक न्याय का नया माध्यम”
मंत्री ने कहा कि सरकार जनजातीय समाज के लिए बुनियादी सुविधाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि “एआई केवल तकनीक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय हासिल करने का नया साधन है। हर परिवार को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के जरिए सम्मानजनक जीवन देना सरकार का लक्ष्य है।”
बैठक में जनजातीय कल्याण विभाग के विशेष सचिव बी.एम. संतोष, पीओ भद्राचलम राहुल, उत्नूर परियोजना अधिकारी मंदा मकरंदु, एटूर नागारम पीओ लेनिन वत्सल टोप्पो, प्लेन एरिया परियोजना अधिकारी वी. सर्वेश्वर रेड्डी, निदेशक टीसीआर एंड टीआई डॉ. वी. समुज्वला, एसई हेमलता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
